भारत का वैश्विक Diplomatic Outreach: ऑपरेशन सिंदूर के बाद कूटनीतिक मिशन की शुरुआत
भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक पहल के तहत Diplomatic Outreach अभियान की शुरुआत की है, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया के 7 प्रमुख देशों के समूहों में फैलाया गया है। यह ऐतिहासिक पहल न केवल भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करेगी, बल्कि देश की रणनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी।
Diplomatic Outreach के तहत गठित 7 महत्वपूर्ण देश-समूह प्रतिनिधिमंडल
संसद के सात प्रतिनिधिमंडल 30 से अधिक देशों में जाकर ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देंगे। इस अभियान में विपक्ष और सत्ताधारी दलों के प्रमुख नेता शामिल हैं, जो विश्व समुदाय को भारत के रुख से अवगत कराएंगे।
संक्षिप्त सूची: 7 देश समूह और उनके नेतृत्वकर्ता
| प्रतिनिधिमंडल संख्या | क्षेत्र / देश समूह | नेतृत्वकर्ता |
|---|---|---|
| Group-1 | सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, अल्जीरिया | बैजयंत पांडा |
| Group-2 | यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, डेनमार्क, यूरोपीय संघ | रविशंकर प्रसाद |
| Group-3 | इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर | संजय कुमार झा |
| Group-4 | यूएई, लाइबेरिया, डीआर कांगो, सिएरा लियोन | श्रीकांत शिंदे |
| Group-5 | अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राज़ील, कोलंबिया | शशि थरूर |
| Group-6 | स्पेन, ग्रीस, स्लोवेनिया, लातविया, रूस | कनिमोझी |
| Group-7 | मिस्र, कतर, इथियोपिया, दक्षिण अफ्रीका | सुप्रिया सुले |
Diplomatic Outreach: 7 देश-समूहों में भेजे गए सांसदों की विस्तृत सूची
भारत सरकार द्वारा बनाए गए 7 कूटनीतिक प्रतिनिधिमंडल में देश के विभिन्न राजनीतिक दलों से सांसदों को शामिल किया गया है, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की स्थिति स्पष्ट करेंगे। नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक समूह, उनके गंतव्य और नेताओं की जानकारी दी गई है:
| समूह संख्या | नेतृत्वकर्ता | गंतव्य देश | प्रमुख सदस्य |
|---|---|---|---|
| Group 1 | बैजयंत पांडा (भा.ज.पा) | सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, अल्जीरिया | निशिकांत दुबे, फांगनोन कोन्याक, रेखा शर्मा, असदुद्दीन ओवैसी, सतनाम सिंह संधू, गुलाम नबी आज़ाद |
| Group 2 | रविशंकर प्रसाद (भा.ज.पा) | यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, डेनमार्क, यूरोपीय संघ | डी. पुरंदेश्वरी, प्रियंका चतुर्वेदी, अमर सिंह, एम.जे. अकबर, पंकज सरन |
| Group 3 | संजय कुमार झा (ज.द.यू) | इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर | अपराजिता सारंगी, सलमान खुर्शीद, ब्रिजलाल, जॉन ब्रिटास |
| Group 4 | श्रीकांत शिंदे (शिवसेना) | यूएई, लाइबेरिया, डीआर कांगो, सिएरा लियोन | बंसुरी स्वराज, ई.टी. मोहम्मद बशीर, सस्मित पात्रा, मनन मिश्रा |
| Group 5 | शशि थरूर (कांग्रेस) | अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राज़ील, कोलंबिया | तेजस्वी सूर्या, मिलिंद देवड़ा, शशांक मणि त्रिपाठी, सरफराज अहमद |
| Group 6 | कनिमोझी करूणानिधि (डीएमके) | स्पेन, ग्रीस, स्लोवेनिया, लातविया, रूस | राजीव राय, मियाँ अल्ताफ अहमद, प्रेमचंद गुप्ता, अशोक मित्तल, ब्रजेश चौटा |
| Group 7 | सुप्रिया सुले (एनसीपी – शरद पवार गुट) | मिस्र, कतर, इथियोपिया, दक्षिण अफ्रीका | अनुराग ठाकुर, मनीष तिवारी, लवू देवरायालु, आनंद शर्मा, सैयद अकबरुद्दीन |
Diplomatic Outreach का उद्देश्य क्या है?
केंद्र सरकार के मुताबिक, यह Diplomatic Outreach अभियान उन देशों को भारत की स्थिति स्पष्ट करने का एक प्रयास है जो या तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साझेदार हैं या जिनके साथ कूटनीतिक संबंधों को और मज़बूत करने की जरूरत है।
किरण रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री ने कहा,
“यह सभी दल ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत हमारी एकजुट प्रतिक्रिया और आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प को दर्शाएंगे।”
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
इस outreach की पृष्ठभूमि है पाहलगाम आतंकी हमला, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। भारत सरकार ने इस घटना के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसका उद्देश्य सीमाओं के पार आतंकवादियों को जवाब देना और आतंरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
ऐसी Diplomatic Outreach पहले भी हो चुकी है
भारत पहले भी कई बार Diplomatic Outreach कर चुका है, जैसे:
- बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद 2019 में विदेश मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी अमेरिका, फ्रांस और रूस गए थे।
- 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भी भारत ने कई देशों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की स्थिति की जानकारी दी थी।
लेकिन इस बार की outreach इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की भागीदारी है — यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन चुका है।
निष्कर्ष: भारत का Diplomatic Outreach बना उदाहरण
भारत का यह Diplomatic Outreach न केवल वर्तमान आतंकी घटनाओं का जवाब है, बल्कि वैश्विक कूटनीति में एक नई पहल है। यह अभियान दर्शाता है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया करने वाला नहीं, बल्कि proactively वैश्विक नैरेटिव सेट करने वाला देश बन गया है।
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